काफी सालो के बाद भी अपने आप को अकेला फिर पाया है ।
दिन में भी अंधेरो को अपनाया है।
रातो को भी रौशनी नज़र आती है।
दिन में सोना और रात को रोना ही अब एक सरमाया है।
कहते है दुनिया वाले की कमी क्या है।
कहते है दुनिया वाले की कमी क्या है।
उनको पूछो जो बिना दिल के धड़क जाता है।
बिना फेफड़ो के सांस लेता है।
उनको कहो की हम भी तो जी रहे है अब
कमी क्या है वो कुछ भी नही।
ना दिन अपना है। ना रात अपनी है।
ना ये धड़कन और सांस अपनी है।
-- गुल कपूर
11th June'2020