Thursday, June 11, 2020

कहते है दुनिया वाले की कमी क्या है |


काफी सालो के बाद भी अपने आप को अकेला फिर पाया है ।
दिन में भी अंधेरो को अपनाया है।
रातो को भी रौशनी नज़र आती है।
दिन में सोना और रात को रोना ही अब एक सरमाया है।

कहते है दुनिया वाले की कमी क्या है।
कहते है दुनिया वाले की कमी क्या है।
उनको पूछो जो बिना दिल के धड़क जाता है। 
बिना फेफड़ो के सांस लेता है।

उनको कहो की हम भी तो जी रहे है अब
कमी क्या है वो कुछ भी नही। 
ना दिन अपना है। ना रात अपनी है।
ना ये धड़कन और सांस अपनी है। 




-- गुल कपूर  
 11th June'2020

4 comments:

Vipul Bhatter said...

True lines by deeply heart 💓 feelings ..liked it

Mansi khosla said...

Deep and meaningful.

Muskan said...

I love your writing. Always touches my heart.

Sangita said...

such a beautiful poem .right from the depth of ones heart.love it