Tuesday, May 15, 2018

उसके साथ की पक्की शख्शियत


मेरे हाथ मे पेंट और ब्रश देख कर, मेरा चश्मा नाक के नीचे आते देख कर मेरे पास आ कर मेरा चश्मा वापिस चढ़ा कर बोला, " अब ठीक है?"


मैं हसीं और कहा की "अब ठीक है".



उसके साथ की पक्की शख्शियत दिखी थी मुझे ....


येह नही पता था की आँखों पर चश्मा नही बस पर्दा डालने लगा है.

2 comments:

Vibrant Vipul said...

Bahut Khoob...

"Writing is an exploration. You start from nothing and learn as you go."
E. L. Doctorow

Indresh said...

Awesome and nice lines mam..